भाववाचक संज्ञा
वैसे अगर आप इसके नाम को देखते हैं. तो इसका नाम भाववाचक संज्ञा है. तो आप सोचेंगे कि इसमें सिर्फ किसी विशेष भाव का ही बोध कराया जाता है लेकिन ऐसा नहीं है. इसकी परिभाषा अलग होती है. क्योंकि भाववाचक संज्ञा में भावों के अलावा गुणों दशाओं और अवस्थाओं के नाम को भी जाना जाता है.
यदि किसी विशेष व्यक्ति के भाव, किसी विशेष व्यक्ति के गुणों, या किसी विशेष प्राणियों के गुणों, या प्राणियों के भावों, या किसी विशेष स्थान के भाव, आदि का बोध कराया जाए उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं.भावों के नाम में कई प्रकार के शब्द आते हैं जैसे दया,प्रसन्नता , ईमानदारी, दयालुता, यह सभी शब्द भाववाचक संज्ञा के अंतर्गत आते हैं
उदाहरण
राम बहुत ही ईमानदार है
इस वाक्य में आप देख सकते हैं कि राम के अंदर इमानदारीका गुण है तो राम एक बहुत ही अच्छा लड़का है और वह बहुत ही ईमानदार है यानी इस वाक्य में ईमानदारी का गुण दिखाई दे रहा है ईमानदारी के गुण का बोध कराया जा रहा है जिसके कारण राम भी अच्छा लगता है तो इस वाक्य मैं ईमानदारी शब्द भाववाचक संज्ञा के अंतर्गत आता है.
आज मैं बहुत ही खुश हूं
इस वाक्य में आप को देख सकते हैं कि आज मैं बहुत ही खुशहूं यानी आज मुझे बहुत प्रसन्नता है. इस वाक्य में खुशी का भाव प्रकट किया जा रहा है. खुशी के भाव का बोध कराया जा रहा है. जिसके कारण यह वाक्य है भाववाचक संज्ञा के अंतर्गत आता है. तो इसे भाववाचक संज्ञा कहा जाएगा.
आज मौसम बहुत अच्छा है
ऊपर हमने आपको एक वाक्य बताया है आज मौसम बहुत ही अच्छा है या नहीं इस वाक्य में मौसम के भाव को प्रकट किया जा रहा है है जिससे यह वाक्य भी भाववाचक संज्ञा कहलाएगा.
नीचे हम आपको उन दो संज्ञा के बारे में बताएंगे जो अंग्रेजी प्रभाव के कारण सामने आई हैं. समुदायवाचक संज्ञा और द्रव्यवाचक संज्ञा तो सबसे पहले हम बात करेंगे समुदायवाचक संज्ञा के तो देखिए.
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